शिक्षा, खेल और नई तकनीकी उपलब्धियों में उभर रहा माईटी खालसा इंटरनेशनल स्कूल

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आनंदपुर साहिब (पंजाब)। पंजाब के आनंदपुर साहिब जिले में प्राकृतिक और आध्यात्मिक खूबसूरती के बीच माईटी खालसा इंटरनेशनल स्कूल बच्चों के लिये एक वरदान और बाकी स्कूलों के लिये एक मिसाल साबित हो रहा है।
बताते चलें कि वर्ष 2013 में मात्र 5 बच्चों से शुरू हुये इस स्कूल ने पिछले वर्षों में बहुत सी उपलब्धियां हासिल की हैं।

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यह स्कूल अकाल तख्त साहिब और तख्त केसगड़ साहिब के पूर्व जथेदार सिंह साहिब प्रो. मनजीत सिंह के यतनों से प्रारंभ होकर अब डायरेक्टर अमितोज सिंह के नेतृत्व में ऊंचाईयों को छू रहा है। यह स्कूल आनंदपुर साहिब में अपनी कुदरती खूबसूरती के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा, खेलों, विदेशी दौरों और नई तकनीकी सिखलाईयों के साथ-साथ आर्थिक तौर पर कमज़ोर लोगों की सहायता के लिए जाना जाता है। खेलों में इस स्कूल के छात्रों ने जूनियर हाकी में नेशनल स्तर पर दो गोल्ड मेडल जीते हैं, कराटे चैंपियनशिप में इनाम जीते हैं, गतका और बहुत सारी अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेकर बाकी छात्रों को भी उत्साहित किया है। इनमें से आठ छात्र विभिन्न हॉकी अकेडमी के लिए चुने गये हैं। स्कूल के बैंड भी इंडिया गेट दिल्ली, शिमला और कई शहरों में अपनी कला का जादू दिखा चुका है। छात्रों को दुबई और अलग-अलग स्थानों की ट्रिप के जरिए नई जगहों से सीखने का अवसर दिया जाता है। समय-समय पर आर्ट प्रदर्शनियों, मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेकर छात्रों की मानसिक वृद्धि में बढावा किया जाता है।

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स्कूल की एक और खास बात यह है कि छात्रों को अपने इतिहास और संस्कृति से व्यावहारिक रूप में जोड़ा जाता है। वातावरण को शुद्ध रखने और प्राकृति से स्नेह बनाये रखने के लिए बच्चों से पेड़-पौधे लगवाये जाते हैं। अभी हाल ही में अपने ज़िले में पहली बार चंडीगड़ इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रोन के साथ मिलकर स्टैम लैब की शुरूबात कर एक और कीर्तिमान हासिल किया है जिससे इस कम विकसित इलाके के छात्रों को रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस, ड्रोन, एरोमॉडलिंग, रोकेटरी और 3डी पिं्रटिंग की शिक्षा दी जायेगी। ये लैब सिर्फ अपने स्कूल के बच्चों के लिये ही नहीं बल्कि सभी के सीखने के लिये खुली है।

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अमितोज सिंह का मानना है कि ज्ञान के चाह्वान हर जन को सीखने का अवसर मिलना चाहिये चाहें वो किसी भी उम्र, जगह, जाति, धर्म से सबंध रखता हो। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना के मुश्किल समय में आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों की लगभग दस लाख रुपए से ज्यादा की फीस माफ कर सहायता की गई क्योंकि हमारा ये मानना है कि पैसों की कमी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिये, चाहें स्कूल को कितनी भी मुश्किलों का सामना क्यों न करना पड़े। उन्होंने कहाकि हम यही आशा करते हैं कि इस स्कूल के माध्यम से इसी तरह समाज में शिक्षा और खेल के क्षेत्र में सेवा करते रहें और खुशियां बिखेरते हुये दूसरों को प्रेरणा देते रहें।

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