कांग्रेस सरकार के किस नेता ने अधिकारियों को आदेश दिया कि PM की सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में डाला जाए: स्मृति ईरानी

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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए पूछा है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार के किस नेता ने अधिकारियों को यह आदेश दिया था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में डाला जाए और तमाम सूचना और अलर्ट के बावजूद उन्हें सुरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाए।

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक निजी चैनल द्वारा किए गए स्टिंग का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब पुलिस के अधिकारी प्रधानमंत्री की सुरक्षा भंग होने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों, पंजाब के प्रशासन और सरकार को देते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया , कोई कदम नहीं उठाया गया। भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बात करने के दौरान उन्होंने पंजाब के तत्कालीन डीजीपी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरी व्यवस्था और रूट सुरक्षित है, ऐसा संदेश प्रधानमंत्री की सुरक्षा टीम को डीजीपी ने क्यों दिया?

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कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए स्मृति ईरानी ने पूछा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार के वो आलाधिकारी कौन है जो सारी सूचनाएं और अलर्ट की जानकारी मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री को सुरक्षा देने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रहे थे। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार के किस नेता ने अधिकारियों को यह आदेश दिया था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को पंजाब में खंडित किया जाए? उन्होंने 5 जनवरी को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने जानबूझकर प्रधानमंत्री को असुरक्षित माहौल में रखा और यह न सिर्फ निंदनीय है बल्कि दंडनीय भी है।

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केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के सुरक्षा प्रोटोकॉल और इसके टूटने के बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा प्रियंका गांधी को ब्रीफ करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सूचना सिर्फ सुरक्षा या जांच एजेंसियों तक ही सीमित होनी चाहिए उसके बारे में एक प्राइवेट नागरिक, जो कि गांधी परिवार का हिस्सा है, को सारी जानकारी क्यों दी गई। जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित किए पैनल के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देश पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनके द्वारा गठित किए गए पैनल के तथ्य जब सामने आएंगे तब वो पार्टी के निर्देश पर ही इस पर कोई टिप्पणी करेंगी।

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